प्रवर्तन निदेशालय ने भी शुरू की पीएफ घोटाले की जांच जिसमे 28 कंपनियों के जरिए हुई मनी लांड्रिंग


यूपी पावर कार्पोरेशन में हुए पीएफ घोटाले की जांच प्रवर्तन निदेशालय भी करेगा। इसके लिए प्रवर्तन निदेशालय दिल्ली की टीम ने आर्थिक अपराध अनुसंधान (ईओडब्ल्यू) से दस्तावेज मांगे हैं। ईओडब्ल्यू की ओर से दस्तावेज उपलब्ध भी करा दिए गए हैं।


 

सूत्रों की मानें तो ईओडब्ल्यू को प्रारंभिक जांच में विभिन्न खातों में आए 65 करोड़ रुपये के ब्रोकरेज के बारे में जानकारी मिली थी। ईओडब्ल्यू ने इसकी तफ्तीश की तो पता चला कि ब्रोकर फर्म बनाकर यह पूरा खेल खेला गया है। 

यूपीपीसीएल की पावर इंप्लाईज ट्रस्ट में जमा पीएफ के पैसों का निवेश डीएचएफएल में कराने के लिए कुल 14 ब्रोकर फर्मों ने काम किया। इसमें से 13 फर्मों ने हेराफेरी की थी।

इन फर्मों से 14 अन्य फर्मों के खातों में पैसे भेजे गए जिनका डीएचएफएल में निवेश से कोई संबंध नहीं था। इन पैसों का इस्तेमाल कालेधन को सफेद करने के लिए किया गया। 
 



खातों में इंट्री दिखाने के लिए एक नंबर का पैसा खाते में लिया गया और उसकेबदले दो नंबर का पैसा (कालाधन) कैश के रूप में वापस कर दिया गया। यानी सीधे तौर पर मनी लांड्रिंग का मामला बनता दिख रहा है। 

इस पैसों को काला सफेद करने में दिल्ली के एक सीए की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। इसी कड़ी में चार्टड एकाउंटेंट ललित गोयल से कई राउंड में पूछताछ की जा चुकी है। ललित गोयल द्वारा बताई गई जानकारी को सत्यापित कराया जा रहा है। 

सूत्रों का कहना है कि इस मामले में चार्टर्ड एकाउंट की गिरफ्तारी भी संभव है। वहीं सूत्रों का कहना है कि इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेज दिल्ली की प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने अपने हाथों में ले लिया है। 

उधर, दूसरी ओर कुछ अन्य फर्मो के मालिकों को शुक्रवार को पूछताछ के लिए बुलाया गया। वहीं डीएचएफएल के भी अधिकारियों को पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया गया है।