घटिया किस्म के सीसीटीवी कैमरों पर दिल्ली पुलिस को लगी अदालत की फटकार, मांगी गई हादसों की स्टेटस रिपोर्ट


नई दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने कश्मीरी गेट रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरों की घटिया क्वालिटी पर पुलिस से जवाब मांगा है। कोर्ट ने वर्ष 2019 में इस रोड पर हुई दुर्घटनाओं का ब्यौरा देने के निर्देश देते हुए पूछा कि सीसीटीवी की वजह से कितनी सड़क दुर्घटनाओं और ट्रैफिक नियम उल्लंघन को मॉनिटर किया गया।


सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान महानगर दंडाधिकारी अभिलाष मल्होत्रा को नॉर्थ दिल्ली की डीसीपी मोनिका भारद्वाज ने बताया कि कश्मीरी गेट रोड पर लगे 74 सीसीटीवी कैमरे पहले से पुराने हैं और उनकी पिक्चर क्वालिटी भी अच्छी नहीं है। स्टेटस रिपोर्ट में डीसीपी ने कहा कि इस संबंध में उन्होंने डीसीपी (प्रोविजन एंड लॉजिस्टिक) से निवेदन किया था कि नवीनतम तकनीकी के सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि गतिविधियों पर बेहतर ढंग से नजर रखी जा सके। 


इसके बाद न्यायाधीश ने डीसीपी (प्रोविजन एंड लॉजिस्टिक) को नोटिस जारी करके जवाब मांगा कि उन्होंने डीसीपी मोनिका भारद्वाज के सीसीटीवी के संबंध में दिए गए निवेदन पर क्या कदम उठाया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 जनवरी, 2020 को तय की है। साथ ही, अदालत ने नॉर्थ दिल्ली डीसीपी से पूछा कि 2019 में अब तक कश्मीरी गेट थानाक्षेत्र में ऐसी कितनी सड़क दुर्घटनाओं के मामले पुलिस के पास पहुंचे, जो सीसीटीवी कैमरों में कैद नहीं हुए। 
इससे पहले कोर्ट ने जुलाई में नॉर्थ दिल्ली की डीसीपी से कश्मीरी गेट रोड पर स्थित हनुमान ब्रिज पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने के संबंध में स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। कश्मीरी गेट रोड पर सड़क दुर्घटना में पिछले साल 35 वर्षीय शख्स की मौत के मुकदमे को बंद करने के लिए आई अर्जी पर कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच जारी है और हादसे को अंजाम देने वाले का कोई सुराग नहीं मिला है तो पुलिस किस आधार पर केस को बंद कर सकती है। 


यह हादसा कश्मीरी गेट बस स्टैंड के नजदीक हुआ था। इसे लेकर पुलिस ने सीसीटीवी कैमरों से अनट्रेस्ड रिपोर्ट दाखिल की थी। इसमें कहा गया था कि हादसे वाली जगह पर कोई कैमरा नहीं था। इसलिए आरोपी का कोई सुराग नहीं मिला।