इटौंजा सिंचाई विभाग के दफ्तर ने लिया खंडहर का रूप दशकों से नहीं हुआ दुरुस्ती करण

इटौंजा, लखनऊ। जहां देश में शासन और प्रशासन हरित क्रांति लाने के लिए कृतसंकल्प है। वहीं किसानों को सिंचाई सुविधा मयस्सर कराने के उद्देश्य से इटौंजा (नहर कोठी) में स्थापित सिंचाई विभाग के दफ्तर व आवास 14 दशक पूर्व निर्मित हुए थे। अब यह खंडहर में तब्दील हो गए हैं। इन आवासों में कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर किसी तरह गुजर बसर कर अपना फर्ज निभा रहे हैं।


         नहर कोठी प्रखंड शारदा नहर सीतापुर उपखंड सिधौली अनुभाग नहर कोठी में निर्मित कार्यालय व आवास का निर्माण यहां के एक सरकारी प्रवक्ता के अनुसार 1880 में हुआ था। जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र के किसानों को सिंचाई सुविधा व उनकी समस्या का फौरी हल प्रदान करना था। यहां पर बिजली की कोई भी व्यवस्था नहीं है।


 

          इस समय यहां पर एक जिलेदार , पेशकार अमीन, सींचपाल चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं ।इनके आवास व कार्यालय इतने जर्जर हैं कि किसी भी पल ढह सकते हैं। और इन कर्मचारियों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।


आवास में प्लास्टर व फर्श नाम मात्र की रह गई है।खिड़कियों व दरवाजों का कहीं अता पता तक नहीं है ।बरसात के समय आवासों व कार्यालय की छतें बुरी तरह से टपकने लगती हैं । जिससे कर्मचारियों को अपने परिवार समेत रात भर जागना पड़ता है । यहां तक कि यहां पर चहरदीवारी तक नहीं है। अब यहां पर एक भी कर्मचारी नहीं रहते है।


           विडंबना इस बात की है कि यहां पर एक मात्र इंडिया मार्क 2 हैंडपंप है जो खराब रहता है।जब इसमें कोई तकनीकी गड़बड़ी आ जाती है तो यहां पर पीने के पानी की त्राहि-त्राहि मच जाती है।


 

      यहां के कर्मचारियों ने बताया कि यहां के अभिलेख तक महफूज नहीं है। इन कठिन परिस्थितियों के जहां कर्मचारी अपने कार्य को अंजाम दे रहे हैं । वहीं सरकार इनके भवन की मरम्मत व निर्माण कार्यों के प्रति उदासीन है । जबकि यहां पर कर्मचारियों की महीने में दो बार बैठक भी होती है।


         अब यह भवन उचक्को, शराबियों चोरों का अड्डा बन कर रह गया है यहां पर छुट्टा जानवर घूमते रहते हैं भवन ढहने के भय से यहां पर कर्मचारी व उनके परिवार नहीं रहते हैं।