पंजाब को करतारपुर कॉरिडोर मिला, एक साथ 20 जानें गईं, फतेहवीर की मौत ने झकझोरा


साल 2019 पंजाब और पंजाबियों के लिए यादगार रहेगा। क्योंकि इस वर्ष जहां करतारपुर कॉरिडोर का सपना पूरा हुआ, वहां मासूम फतेहवीर के साथ हुए हादसे ने झकझोर कर रख दिया।


 

इस साल सिखों की देश के विभाजन के समय से चली आ रही मांग पूरी हुई। संगतों की अरदास रंग लाई और पाकिस्तान स्थित गुरद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शन का सपना साकार हुआ। वहां गुरु जी ने अपने जीवन के अंतिम साल बिताए और प्रमुख संदेश दिए थे।

यह सपना सच होने से खुशी दोगुनी हो गई, क्योंकि दुनिया भर में संगत श्री गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाश पर्व मना रही है। हालांकि इस संजीदा मसले पर भी आशंकाओं और सियासत का साया रहा। भारत और पाकिस्तानी अधिकारियों के बीच कई बैठकों के बाद सहमति बनी।

लेकिन पाकिस्तान ने बीस डॉलर प्रति यात्री फीस वसूलने की शर्त नहीं छोड़ी। बिना पासपोर्ट दर्शन करवाने के लिए भी वह तैयार नहीं हुआ। आखिर अक्तूबर के अंत में भारत और पाकिस्तान ने डेरा बाबा नानक में अंतरराष्ट्रीय सीमा के जीरो प्वाइंट पर कॉरिडोर बनाने के समझौते पर दस्तखत किए, जो पाकिस्तान के नारोवाल जिले स्थित गुरद्वारा करतारपुर साहिब से भारत के डेरा बाबा नानक गुरद्वारा साहिब तक बनाया गया है।



कॉरिडोर पर राजनीति और बयानबाजी भी खूब हुई




इन सभी के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने नवंबर में करतारपुर कॉरिडोर देश को समर्पित कर दिया। सीएम की अगुवाई में पहले जत्थे का स्वागत पाक पीएम इमरान खान ने किया। जत्थे में अकाली दल का शीर्ष नेतृत्व भी शामिल था। हालांकि, करतारपुर साहिब जाने वाली संगत की संख्या उम्मीद से काफी कम रही। इसके लिए पासपोर्ट और बीस डॉलर फीस को जिम्मेदार माना जा रहा है।

550वां प्रकाश पर्व धूमधाम से मनाया
इस साल श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व को लेकर भी संगत में खासा उत्साह रहा। 12 नवंबर को सुल्तानपुर लोधी में लाखों की तादाद में संगत उमड़ी, जहां गुरु जी ने जीवन के 14 वर्ष बिताए थे। यहां भी सियासत हावी रही। पंजाब सरकार और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए।

इस महत्वपूर्ण मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पत्नी सहित गुरुद्वारा साहिब में नतमस्तक हुए। वह दोनों के समागम में भी गए। इतनी ज्यादा संगत के बावजूद सफलतापूर्वक समागम कराने के लिए पुख्ता इंतजाम की लोगों ने सराहना की।



फतेहवीर सिंह की मौत दुखद घटना


संगरूर में दो साल के फतेहवीर सिंह की मौत साल की सबसे दुखद घटनाओं में रही। फतेहवीर खेलते-खेलते 150 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। उसे बचाने के लिए 109 घंटे तक ऑपरेशन चला, लेकिन जिंदगी मौत से हार गई। उसे बचाया नहीं जा सका। जब तक उसे बाहर निकाला गया, तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।

फैक्ट्री में ब्लास्ट, 20 की मौत
बटाला में रिहायशी इलाके में चल रही एक पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ, जिसमें बीस लोगों की मौत हो गई, कई लोग जख्मी हो गए। इस हादसे ने पूरे पंजाब को हिलाकर रख दिया।

बारिश, बाढ़ और पराली का जलना
अगस्त में पंजाब और हिमाचल प्रदेश में लगातार तेज बारिश से भाखड़ा बांध का जलस्तर बढ़ गया। फिर जब बांध से पानी छोड़ा गया तो पंजाब के कई जिलों में बाढ़ आ गई, जिससे करीब दो हजार करोड़ का नुकसान हुआ।

पराली जलाने का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर छाया
नवंबर में एक बार फिर पंजाब में पराली जलाने का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर छाया। स्मॉग ने दिल्ली को बेदम किया। राज्य सरकार के तमाम इंतजाम के बाद भी पराली जलाने के मामले बढ़ गए। 50000 से ज्यादा केस सामने आए।

आतंकियों, ड्रोन और हथियारों ने चौंकाया
सितंबर में आतंकियों ने नया तरीका अपनाते हुए ड्रोन से हथियार भेज कर सुरक्षा एजेंसियों को चौंकाया। यह अपनी तरह का पहला मामला था, जब पाकिस्तान से जीपीएस लगे ड्रोन से तरनतारन में हथियार और कम्यूनिकेशन हार्डवेयर भेजे गए। पंजाब पुलिस की जांच में पता चला कि इसके पीछे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स का हाथ था।

प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट
इस साल भी सरकार आर्थिक तंगी से जूझती रही। निवेश आकर्षित करने को दिसंबर में प्रोग्रेसिव पंजाब इन्वेस्टर्स समिट भी कराया गया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली।


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