प्रदेश सरकार कराए नुकसान की क्षतिपूर्ति: भारत सिंह

 उपजा की लखनऊ इकाई ने की बैठक
 पत्रकारों की सुरक्षा व नुकसान को लेकर सरकार को पत्र लिखे जाने का लिया निर्णय।


लखनऊ। यूपी जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन(उपजा) की लखनऊ इकाई लखनऊ जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन(लखनऊ उपजा) ने तहजीब और अदब के शहर लखनऊ एवं उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में कल हुई हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा की है। लखनऊ में उपजा के प्रांतीय कार्यालय 28 बी दारुलशफा में आपातकालीन बैठक में की। हिंसा और प्रदर्शन की कवरेज करने गए पत्रकारों पर हुए हमले, ओबी वैन जलाये जाने समेत कई पत्रकारों के कैमरे, आईडी, ट्राईपोड व कवरेज से सम्बंधित उपकरण जल गए अथवा टूट गए। इस दौरान कई पत्रकारों, फोटो जर्नलिस्ट चोटिल भी हुए हैं। उपजा की लखनऊ इकाई ने राज्य सरकार से क्षतिपूर्ति कराए जाने की मांग की है।
लखनऊ उपजा के मार्गदर्शक मंडल के सदस्य श्री अजय जायसवाल ने कहा इस घटना की जितनी भी निंदा की जाए, कम है। कहा कि ये कहना गलत नही होगा कि जानबूझकर कर मीडिया को टारगेट बनाया गया। हालांकि इस तरह की घटनाओं की कवरेज के दौरान पत्रकार होने का सुबूत देना मुश्किल होता है। फिर भी पत्रकारों को अपनी पहचान और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कवरेज करना होगा। बैठक में मार्गदर्शक मंडल के सदस्य श्री प्रमोद गोस्वामी ने कहा हिसंक प्रदर्शन और पत्रकारों के साथ अमर्यादित व्यवहार निदांजनक है। पत्रकारिता काफी कठिन और जोखिम भरा काम होता है। इस तरह के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और पत्रकार के बीच असमंजस की स्थिति होती है। दोनों के लिए ही सुरक्षा व्यवस्था चुनौतीपूर्ण कार्य है। पुलिस के जवान भी शिकार बन जाते हैं। ऐसे में सुरक्षात्मक उपाय पत्रकारों को खुद तलाशने होंगे। कहा कि आई कार्ड लेकर कवरेज करने जाए, फिलहाल ये पहला कदम हमारा होना चाहिए। लखनऊ उपजा के अध्यक्ष श्री भारत सिंह ने कहा अच्छी-बुरी खबरों के संकलन में पत्रकारों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसमें उनका नुकसान भी होता है, ये भी व्यवस्था का एक अंग होते हैं। इसलिए इनके नुकसान की क्षतिपूर्ति सरकार को करानी चाहिए। महामंत्री आशीष मौर्य ने कहा है कि कवरेज के दौरान जिन भी पत्रकारों को नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई एवं मुआवजे की मांग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लखनऊ उपजा करेगा। मंत्री पद्माकर पांडेय, विनय तिवारी, सदस्य अरविंद त्रिपाठी ने कहा पत्रकारों पर हमलों किया जाना सर्वथा गलत है। पहले भी घटनाएं हो चुकी हैं। पदाधिकारियों व सदस्यों ने कहा हमारे लिए ऐसे माहौल में काम करना असमंजस भरा होता है। कहा कि सीएम का ये फैसला कि उपद्रवियों की संपत्ति जब्त कर नुकसान की भरपाई की जाए, स्वागत योग्य है। सरकार को सख्त कदम उठाते हुए पत्रकारों के हुए नुकसान की भी भरपाई करानी चाहिए। यूएनआई के वरिष्ठ पत्रकार जर्नादन ने कहा सरकारी संपत्तियों के नुकसान का आंकड़ा तो जुटाया जाता है मगर पत्रकारों के हुए नुकसान का आकंड़ा भी होना चाहिए। बैठक में सदस्य अनूप मिश्रा, अखिलेश पांडेय, महेंद्र तिवारी, विशेष सक्रिय सदस्य के के सिंह, सतीश द्विवेदी, संतोष सिंह, वीरेंद्र त्रिपाठी, दीपक शुक्ला, डीएन वर्मा, मनोज सिंह, प्रभाकर शुक्ला आदि सैकड़ों पत्रकार मौजूद रहे।