‘रेटिंग खरीदारी’ पर इसबार RBI ने लगाई फटकार, सभी कंपनियों को दी गई थी अच्छी रेटिंग




पूंजी बाजार नियामक सेबी द्वारा प्रमुख रेटिंग एजेंसियों पर जुर्माना लगाने के बाद अब रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी इन एजेंसियों को फटकार लगाई है। रिजर्व बैंक ने खराब रेटिंग पाने वाली कंपनियों को तीन महीने के भीतर अच्छी रेटिंग देने में रेटिंग एजेंसियों की भूमिका को लेकर उनकी कड़ी आलोचना की है।
 

दरअसल, इसी रेटिंग के सहारे कुछ कंपनियों ने दीर्घावधि कर्ज ले लिए। इसी प्रक्रिया को 'रेटिंग की खरीदारी' कहा जाता है।

रिजर्व बैंक ने वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट के 25वें संस्करण में क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की सीमित रेटिंग के आधार पर बैंकों से दीर्घकालिक कर्ज लेने को लेकर कंपनियों को भी चेतावनी दी है। रिपोर्ट में कहा गया कि रेटिंग की ज्यादातर 'खरीदारी' बीबीबी या इससे कम रेटिंग वाले वित्तीय साधनों में की गई।

रिजर्व बैंक ने ऐसे मामलों की गहन जांच करने की बात की है। 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के लिए भी क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों की खराब नीतियों को जिम्मेदार माना जाता है।

घरेलू स्तर पर देखें तो जब सितंबर 2018 में आईएलएंडएफएस के डिफॉल्ट का मामला सामने आया था, उसके कुछ ही दिन पहले इंडिया रेटिंग्स, इक्रा और केयर जैसी रेटिंग एजेंसियों ने उसके ऋण दस्तावेजों को एएए/एए+ रेटिंग दी थी। इसी मामले में सेबी ने पिछले शुक्रवार को इन एजेंसियों पर 25-25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है।