सत्ता में आते ही कांग्रेस करेगी CAA में कई बदलाव : पवन खेड़ा


कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा है कि सत्ता में आते ही कांग्रेस पार्टी नागरिकता संशोधन कानून में आवश्यक बदलाव करेगी। सोमवार को राजधानी शिमला स्थित कांग्रेस पार्टी के मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए खेड़ा ने एनआरसी को सिरे से नामंजूर करते हुए सीएए में धर्म के आधार पर भेदभाव न करने की केंद्र सरकार को सलाह दी। केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाते हुए उन्होंने एनआरसी को लेकर खड़ी हुई उलझन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण भी मांगा।


 

पवन खेड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार के कामकाज को लेकर आज पूरे देश में गुस्सा है। युवा सड़क पर उतर कर विरोध कर रहे हैं। केंद्र सरकार संविधान से छेड़छाड़ कर रही है। एनआरसी को लेकर मोदी और शाह के बयान भी अलग-अलग हैं। शाह एनआरसी लाने की बात कर रहे हैं। राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी एनआरसी को लाने की बात कही गई। जबकि, दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री ने एनआरसी नहीं लाने की बात कही।

उन्होंने कहा कि इसे लेकर जानबूझ कर भ्रम पैदा किया जा रहा है। एनआरसी और एनपीआर को लेकर तरह-तरह के भ्रम पैदा किए जा रहे हैं। वाजपेयी सरकार ने 2003 में नागरिकता कानून को संशोधित किया था। देश के 12 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के 31 लाख लोगों के लिए पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया। 2006 में यूपीए सरकार को कमेटी ऑफ सेक्रेटरी ने रिपोर्ट सौंप कर इस कार्य को मुश्किल और अव्यवहारिक बताया। इसके बाद मंत्रियों के एक समूह ने इस अभियान को रोक दिया। अब केंद्र सरकार ने एनपीआर में ऐसी शर्तें जोड़ दी हैं, जिनको पूरा करना असंभव है। 

श्रीलंका के हिंदू-तमिल, नेपाल के मधेसी से भेदभाव क्यों
कांग्रेस नेता ने पूछा कि नागरिकता संशोधन कानून में श्रीलंका के हिंदू-तमिल और नेपाल के मधेसी से भेदभाव क्यों किया गया है? अप्रैल 1937 तक वर्मा भी भारत की बर्तानी हुकूमत का हिस्सा था। ऐसे में म्यांमार और तिब्बतियों को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है। केंद्र सरकार को इन सवालों के जवाब देने चाहिए।

सावरकर ने की धर्म के आधार पर देश बंटवारे की बात
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि धर्म के आधार पर देश के बंटवारे की बात 1937 में हिंदू महासभा के कर्णवती अधिवेशन में वीर सावरकर ने की थी। 1940 में मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेशन में मोहम्मद अली जिन्ना ने यह बात दोहराई। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कांग्रेस ने तमाम प्रांतीय सरकारों से इस्तीफा देकर आंदोलन शुरू कर दिया। तब सिंध और बंगाल के प्रांतों में हिंदू महासभा और मुस्लिम लीग की सरकारें बनीं। सिंध प्रांत की असेंबली में देश के बंटवारे का प्रस्ताव पारित हुआ।