विवादित लिपिक के हाथ फिर उपजिलाधिकारी न्यायालय की कमान

गैर प्रान्त के नाम पर शस्त्र लाइसेन्स जारी कर करोड़ो की वसूली का है लिपिक पर आरोप


कौशाम्बी। हमेशा विवादो से घिरे रहने वाले एक लिपिक को फिर उप जिलाधिकारी मंझनपुर के कार्यालय में तैनाती दे दी गयी है। नाम आते ही लोगो ने लिपिक के कारनामो पर चर्चा शुरू कर दी है पूर्व में मंझनपुर तहसील में तैनाती के दौरान फर्जी तरीके से सरकारी भूमि का पट्टा अपने परिजनो के नाम कर दिया गया था। 


जिसका मुकदमा भी लम्बे समय से चल रहा था कुछ पट्टे खारिज हो गये है कुछ विचाराधीन है। उक्त लिपिक पर आरोप है कि उपजिलाधिकारी के मुकदके की सुनवाई मे न्यायालय के पूरे नियम कानून को दरकिनार कर एक पत्रावली का पूर्व की तरीखो में निस्तारण कराया गया है जबकि इस मामले में तत्कालीन उपजिलाधिकारी भी सवालो के घेरे में है।


 जिस लिपिक को तहसील मंझनपुर का चार्ज सौपा गया है उस पर पूर्व मे खनन विभाग में भी हेरा-फेरी करने का आरोप था लेकिन इस आरोप की पत्रावली कार्यवाही के नाम पर कई वर्षो से धूल फाक रही है विवादित लिपिक को शस्त्र अनुभाग का भी कुछ दिनो के लिए दायित्व सौपा गया था 


जहॉ जिलाधिकारी की मर्यादा को तार-तार कर करोड़ो का अवैध धन वसूली उक्त लिपिक के कार्यकाल में की गयी थी जिस पर तत्कालीन जिलाधिकारी ने इनके शस्त्र अनुभाग का चार्ज छीन लिया जिले में सिक्किम, पंजाब,जम्मू कश्मीर सहित विभिन्न प्रान्तो से लोगो के नाम शस्त्र लाइसेन्स जारी किये गये है जो पूरी तरह से फर्जी है।


 जिले में अवैध तरीके से हजारो लोगो को शस्त्र मालिक बना दिये जाने के इस मामले में जॉच भी शुरू हुयी लेकिन अचानक शस्त्र कार्यालय से शस्त्र अभिलेख रजिस्टर गायब हो गये उस समय भी यही विवादित लिपिक थे आज तक हजारो फर्जी शस्त्र लाइसेन्स की जॉच पूरी नही हो सकी है।


 विवादित लिपिक को चार्ज दिये जाने के बाद उप जिलाधिकारी कार्यालय के अभिलेखो में फिर हेरा- फेरी की आशंका लोगो ने जताना शुरू कर दी है। उक्त लिपिक का एक राजघराने से गहरा तालुक है जिसके चलते बीते लोकसभा चुनाव मे उसने योगी मोदी के प्रत्याशियों का डटकर विरोध भी किया था।