योगी के कड़े फैसले से पुलिस के आगे गिड़गिड़ाए दंगाई

प्रयागराज। नागरिकता कानून के विरोध की आड़ में दंगाइयों ने खूब बवाल काटा, सड़कों पर उतरकर सरकारी संपत्ति को बेखौफ होकर भारी नुकसान पहुंचाया कहीं कारों, बसों,बाईकों और पुलिस थानों को आग के हवाले किया तो कहीं ट्रैफिक जाम करके राहगीरों को परेशान किया।


इन दंगाइयों ने हिंसा की आग से किसी सूबे को सबसे ज्यादा सुलगाया तो वह है देश का सबसे बड़ा सूबा उत्तर प्रदेश, जहां पिछले कई दिनों तक इन उपद्रवियों ने खूब उत्पात मचाते हुए सरकारी संपत्ति को भारी तादाद में नुकसान पहुंचाया।
लेकिन इन्हें यह नहीं पता था कि जहां यह नुकसान पहुंचा रहे हैं वहां सूबे में से योगी की सरकार है और जब वह एक्शन मोड में आएंगे तो दंगाइयों की सारी हेकड़ी निकल जाएगी।
ऐसा हुआ भी मुल्ला मौलवी और नेताओं के बहकावे में आकर दंगाइयों ने उपद्रव मचा कर सरकारी संपत्ति को नुकसान तो पहुंचा दिया लेकिन अब योगी सरकार ने सख्ती बरतते हुए इन पर वसूली अभियान शुरू कर दिया तो इनकी सारी गुंडागर्दी निकल गई और अब योगी की पुलिस के आगे रहम की भीख मांग रहे हैं।
दरअसल सड़कों पर उतरकर उत्पात मचाने वालों ने सोचा नहीं था कि जब योगी का डंडा चलेगा तो उनकी सारी अकड़ ढिली हो जाएगी । अब पुलिस की सख्ती बड़ी है तो बचने के लिए आरोपियों के परिजन हर दर पर फरियाद लेकर पहुंच रहे हैं। सूत्रों की मानें तो
दंगाइयों के घर वाले कभी जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे हैं तो कभी पीस कमेटी की बैठक में आने वाले उन इमाम मौलवी से पैरवी करा रहे हैं जो पुलिस के करीबी हो लेकिन योगी की पुलिस साक्ष्यों के आधार पर ही कार्यवाही के मूड में है वह ना तो नेताओं की सुन रही है और ना ही किसी मुल्ला मौलवी की पुलिस तो सिर्फ और सिर्फ अपने मुखिया के एक्शन पर काम कर रही है।


सूत्रों की मानें तो यह बात भी सामने आ रही है कि जिनकी गलती थोड़ी कम है उन्हें चर्च के साथ रियायत दी जा सकती है।
शर्त ऐसी है कि फिर उत्पात मचाया तो कड़ी कार्यवाही होगी मगर उन दंगाइयों के ऊपर कतई भी रहम नहीं किया जाएगा जिन्होंने जमकर सरकारी संपत्ति और राहगीरों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
सूत्रों की मानें तो पुलिस अफसरों के पास रोजाना पहुंचने वाले ऐसे लोगों की संख्या 10 से ज्यादा है जो किसी राजनीतिक पार्टियों के नेता हैं जो उनके घर के हालात की दुहाई लेकर मदद मांग रहे हैं तो कई मुस्लिम धर्मगुरु मदद की आस के साथ पुलिस अफसरों के पास पहुंच रहे हैं। इसमें सबसे ज्यादा वह लोग हैं जिनके खिलाफ शांति भंग के तहत कार्यवाही की गई है और 14 दिन की रिमांड पर है। अब पुलिस भी अमन चाहती है इसलिए प्रशासन ने तालमेल बैठाकर कुछ लोगों को रियायत देने की तैयारी कर ली है, यह वह लोग हैं जिनकी जिम्मेदारी उनके परिवारजनों ने इस शर्त पर ली है कि दोबारा गलती करने पर वह भी पैरवी करने नहीं आएंगे।


हम उन लोगों से यही अपील करेंगे कि जो लोग कुछ नेताओं और मुल्ला मौलवियों के बहकावे में आकर सड़कों पर उतर कर उत्पात मचा रहे हैं वह हमारे लोकतंत्र और गांधीजी के अहिंसा वादी नीति के खिलाफ हैं क्योंकि सूट बूट पहनने वाले, ए सी में रहने वाले और  महंगी गाड़ियों में घूमने वाले नेताओं के धार्मिक जहर घोलने वाले भाषणों से आप भड़क तो जाते हैं लेकिन उसका भारी अंजाम आपको और आपके पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है क्योंकि यह बात हर किसी को अच्छे से पता है कि अपनी राजनीति चमकाने के लिए नेता इसी तरह के मुद्दों को ढूंढते हैं जिसमें धार्मिक एंगल हो। इसलिए अब आप आगे से ऐसे नेताओं के बहकावे मैं बिल्कुल ना आए जो आपके परिवार को उजाड़ कर अपनी राजनीति चमकाने का काम करते हैं।