भागवत के बयान को मिला मौलाना तौकीर का समर्थन, दो बच्चों का कानून बोले- लागू होना चाहिए


जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत के फॉर्मूले पर दुनिया भर में मान्यता रखने वाले बरेलवी मरकज से सहमति के सुर उठे हैं। बरेलवी मरकज की अहम शख्सियत माने जाने वाले इत्तेहादे मिल्लत कौंसिल प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खां ने बढ़ती जनसंख्या को सबसे गंभीर समस्या करार देते हुए देश में दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने पर पाबंदी को जरूरी बताया है। उनके इस बयान पर उलमा के बीच हलचल शुरू हो गई है। हालांकि इत्तफाक और नाइत्तफाकी के बीच घिरे ज्यादातर उलमा फिलहाल कुछ कहने से बच रहे हैं। 
 

मौलाना तौकीर ने हालांकि यह भी कहा है कि बढ़ती जनसंख्या के लिए मुसलमानों को बदनाम न किया जाए। उन्होंने हुकूमत को सर्वे कराने की चुनौती देते हुए कहा है कि मुसलमानों में चार शादियां जायज जरूर हैं लेकिन चार शादियां कोई करता नहीं है न किसी के 25 बच्चे होते हैं। उन्होंने इसे आरएसएस का प्रोपेगंडा बताते हुए कहा है कि नाजायज शादियां उनके यहां होती हैं और 11-11 बच्चे भी वही लोग पैदा करते हैं। 
 
हालांकि वे यह मानते हैं कि जनसंख्या जिस बेतहाशा ढंग से बढ़ रही है, वह देश के लिए गंभीर समस्या है और उसे कंट्रोल किया जाना बेहद जरूरी है। इसलिए वह बिल्कुल सहमत हैं कि दो से ज्यादा बच्चे पैदा करने वालों पर चुनाव लड़ने के साथ सरकारी नौकरी दिए जाने पर भी पाबंदी लगनी चाहिए लेकिन इस पाबंदी को हिंदू-मुस्लिम के नजरिये से देखे बगैर लोगों की जेहनसाजी भी की जाए। 


हर मुसलमान इस गणतंत्र दिवस पर अपने घर पर तिरंगा लगाए



मौलाना तौकीर ने कहा कि नागरिकता कानून और एनपीआर देश में जम्हूरियत खत्म करने की आरएसएस की साजिश है। मुसलमानों को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा है। इससे पहले उन्हें आतंकवादी बताया जाता था लेकिन अब वह हुकूमत से पूछना चाहते हैं कि बम फोड़ने वाले अब कहां गए। उन्होंने कहा कि आरएसएस के लोग ही बम फोड़ते थे और मुसलमानों पर इल्जाम लगाते थे। नागरिकता कानून लागू होने के बाद उन्होंने इस गणतंत्र दिवस को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि मुसलमानों से उसे पूरे जोशखरोश से मनाने को कहा और अपने घरों पर तिरंगा जरूर लगाने की अपील की।

जनसंख्या पर रोक लगाने का कोई प्रावधान शरीयत में नहीं है, दुनिया बहुत बड़ी है और असबाब अल्लाह तआला पैदा करता है। अल्लाह जिसको जितनी औलाद देता है, उतना रिजक भी देता है। शरीयत में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। हुकूमत तो दो-चार करोड़ लोगों को बाहर से लाने की बात कह रही है, फिर जनसंख्या नियंत्रण की बात तो बेमानी है। -मौलाना तसलीम रजा खां, नबीरे आला हजरत

जहां तक सरकार की पॉलिसी का मामला है, वह अपनी जगह है। फैसला क्या करना है, यह भी अपनी जगह है, लेकिन कोई मंसूबाबंदी का रास्ता बनता है तो इसके लिए बैठकर पुनर्विचार करना चाहिए और विकल्प निकल सकता है तो उस पर गौर करने की जरूरत है। हालांकि इस्लाम का नजरिया साफ है कि कुदरत के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। - मौलाना इंतजार, राष्ट्रीय अध्यक्ष सुन्नी उलमा कौंसिल