महाराष्ट्र: पाथरी नहीं होगा साईं का जन्मस्थान, सरकार के आश्वासन पर शिरडीवासियों का आंदोलन खत्म, पाथरी को तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने के लिए 100 करोड़ रूपए दिए जाएंगे


शिरडी के साईंबाबा के जन्मस्थान को लेकर शुरू हुआ विवाद सुलझ गया है। महाराष्ट्र सरकार पाथरी को साईं जन्मस्थान का दर्जा नहीं देगी। लेकिन, पाथरी को तीर्थस्थल के रूप में विकसित करने के लिए 100 करोड़ रूपए दिए जाएंगे।
 

सोमवार को राज्य अतिथिगृह सहयाद्री में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में यह निर्णय लिया गया। इस आश्वासन के बाद शिरडीवासियों ने अनिश्चितकालीन आंदोलन खत्म कर दिया है।

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने शिरडी से 281 किलोमीटर दूर परभणी जिले के पाथरी गांव को साई का जन्मस्थान बताते हुए विकास के लिए 100 करोड़ रूपए देने की घोषणा की थी। शिरडीवासी इससे नाराज हो गए और रविवार को शिरडी बंद रखा था।

उद्धव ठाकरे की ओर से बैठक में शामिल होने का न्योता मिलने के बाद देर रात आंदोलन खत्म कर दिया गया था। सोमवार को शिरडी के भाजपा विधायक व पूर्वमंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल सहित शिरडी ग्रामसभा के पदाधिकारी सहयाद्री अतिथि गृह पहुंचे और बैठक में हिस्सा लिया।

इस बैठक में उपमुख्यमंत्री अजीत पवार सहित प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व राजस्व मंत्री बाबासाहेब थोरात, साईं संस्थान के पदाधिकारी सहित अन्य मंत्री भी शामिल थे। 


उद्धव ने वापस लिया बयान



शिवसेना सांसद सदाशिव लोखंडे ने कहा कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अपना बयान वापस ले लिया है। उन्होंने कहा था कि पाथरी साईंबाबा का जन्मस्थान है। उन्होंने कहा कि पाथरी के विकास के लिए तैयार किए गए विकास प्रस्ताव से भी साईं जन्मस्थान का उल्लेख नहीं होगा।

आंदोलन खत्म, पाथरी के विकास का विरोध नहीं- विखे पाटिल


साईंबाबा जन्मस्थान विवाद को लेकर हुई बैठक के बाद राधाकृष्ण विखे पाटिल ने कहा कि हमने अपना पक्ष रखा। मुख्यमंत्री ने हमारी मांग को स्वीकार किया है। उनके आश्वासन के बाद आंदोलन वापस ले लिया गया। उन्होंने कहा कि हमारा पाथरी के विकास का विरोध नहीं है।