पूर्व पुलिस कप्तान का कार्यकाल भी चर्चाओ में रहा थाना और पुलिस चौकियो की जिम्मेदारी बदल कर वसूली का चलता रहा सिलसिला

नये पुलिस कप्तान की व्यक्तिगत छवि ईमानदार उनकी आंख में धूल झोककर थाना चौकी बेचने का हो रहा कार्य


कौशाम्बी। उत्तर प्रदेश में गत दिनो एक आईपीएस को आरोपित किया गया जिसकी जॉच लम्बित है। कौशाम्बी में भी बीते दो वर्षो से इस तरह की चर्चा तेजी से हो रही है कि एक स्टोनो थाना पुलिस चौकी बेचने का काम करता है। उसी के इशारे पर पुलिस चौकी से लेकर थाने तक की इंचार्जी मिलती है।


 पूर्व पुलिस कप्तान का कार्यकाल भी चर्चाओ में रहा है और ताश के पत्ते की तरह थाना और पुलिस चौकियो की जिम्मेदारी बदल कर वसूली का सिलसिला चलता रहा है। पूर्व पुलिस कप्तान के तैनाती के बाद नये पुलिस कप्तान की तैनाती जिले में हुयी जिनकी व्यक्तिगत छवि आम जनता के बीच में ईमानदार अफसर के रूप में है। लेकिन ईमानदार पुलिस कप्तान की आखों में धूल झोककर थाना चौकी बेचने का काम किया जा रहा है। 


लम्बे अर्से से जिले में काकश सक्रिय है थाना चौकी बेचने के मामले में बीते दो वर्षो से एक भूमाफिया का नाम तेजी से जन चर्चा में है और इस भूमाफिया के जरिये थानेदारी और पुलिस चौकी में तैनाती होती है सौदेबाजी का यह खेल जिला कचेहरी से आधा किलो मीटर की दूर पर होता है भूमाफिया से तैनाती की सिफारिश करते वर्दीधारी देखे जाते है। 


थानो की तैनाती में लाखो का सौदा करने वाले भूमाफिया ने जिसे तैनात कराने का आश्वाशन दिया उसे इंचार्जी मिल ही जाती है। आखिर भूमाफिया का थाना चौकी तैनाती का यह खेल कब तक चलता रहेगा। इसे लेकर लोगो के बीच चर्चाए होती है।


 चर्चाओ पर जाये तो थाना चौकी में तैनाती दिलाने के आड में अपने निजी स्वार्थ को सीधा करने के साथ साथ कुछ वर्षो में भूमाफिया ने करोडो की सम्पत्ति आर्जित की है। 


एसपी स्टोनो की तैनाती में आखिर पक्षपात क्यों।


कौशाम्बी। पुलिस विभाग में स्टोनो की तैनाती में भी पूर्व पुलिस कप्तान ने जमकर पक्षपात किया था और वरिष्ठ स्टोनो को क्षेत्राधिकारी कार्यालय भेजकर कनिष्ठ स्टोनो को पुलिस कप्तान आवास में तैनाती दी गयी है। जिले में दुर्गेश श्रीवास्तव क्षेत्राधिकारी चायल कार्यालय में स्टोनो है यह सीनियर है मोहम्मद जाकिर हुसैन मंझनपुर क्षेत्राधिकारी कार्यालय में स्टोनो है यह भी वरिष्ठता सूची में शामिल है। लेकिन इन दोनो स्टोनो को पुलिस अधीक्षक आवास पर तैनाती नही दी गयी है। क्षेत्राधिकारी सिराथू कार्यालय में स्टोनो का कार्य फहीम अहमद को सौपा गया है। जबकि पुलिस अधीक्षक आवास में अविनाश सिंह को एसपी स्टोनो का दायित्व सौप गया है। जो कनिष्ठ स्टोनो है। 


आखिर कभी आईजी डीआईजी के स्टोनो रहे दुर्गेश श्रीवास्तव को एसपी का स्टोनो बनाने में क्यों पहरेज किया गया है। पूर्व पुलिस कप्तान की आखिर वह कौन सी इच्छा थी जिसे दुर्गेश श्रीवास्तव नही पूरी कर सके। उपेन्द्र यादव को अपर पुलिस अधीक्षक का स्टोनो बनाया गया है। जबकि इनसे वरिष्ठ लोग क्षेत्राधिकारी कार्यालय में भेजे गये है। आखिर स्टोनो की तैनाती में पक्षपात क्यों हुआ है। इसे लेकर लोगो के बीच चर्चाए तेज है।