आप' को तीसरी बार दिल्ली का ताज, बस पांच कदम बढ़ सकी भाजपा, कांग्रेस फिर मोहताज

  मुस्लिम बहुल सीटों पर भाजपा को लगा शाहीन बाग का करंट


नई दिल्ली ।     देश के दिल दिल्ली में एक बार फिर आम आदमी पार्टी (आप) की ऐसी आंधी चली जिससे न सिर्फ भाजपा के मंसूबों पर पानी फिर गया बल्कि कांग्रेस भी पूरी तरह उजड़ गई। दिल्ली ने आप के ‘अच्छे बीते पांच साल’ के दावे पर मुहर लगाते हुए अगले पांच साल के लिए ‘लगे रहो केजरीवाल’ का जनादेश दिया। मंगलवार को आए विधानसभा चुनाव के नतीजों में आप ने ऐतिहासिक प्रदर्शन दोहराते हुए 70 में से 62 सीटें जीतकर सत्ता में जबरदस्त वापसी की। वहीं, लोकसभा चुनाव में 57 फीसदी वोटों के साथ सभी सात सीटें जीतने वाली भाजपा पांच सीटों के फायदे के साथ सिर्फ आठ सीटों पर सिमट गई। दूसरी ओर, 15 साल दिल्ली पर राज करने वाली कांग्रेस का पिछली बार की ही तरह इस बार भी खाता नहीं खुला है। राष्ट्रीय राजधानी की जनता ने भारत-पाकिस्तान का मुकाबला, आतंकवादी, अराजक, टुकड़े-टुकड़े गैंग, गोली मारो और बिरयानी खिलाने जैसे भड़काऊ नारों की जगह बिजली, पानी, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मूलभूत मुद्दों पर वोट दिया। यही कारण है कि पिछले विधानसभा चुनाव में 95 फीसदी सीटें जीतकर इतिहास रचने वाली आप ने फिर 90 फीसदी सीटें जीतकर वापसी की है।नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जीत के लिए दिल्ली की जनता को बधाई दी। आप सिर्फ गांधीनगर, घोंडा, करावल नगर, रोहिणी, रोहतास नगर, विश्वास नगर, लक्ष्मीनगर, बदरपुर सीट पर हारी है। ये सभी सीटें भाजपा के खाते में गई हैं। इनमें से पांच सीटें पिछली बार आप के पास थीं। वहीं, भाजपा पिछली बार जीती मुस्तफाबाद सीट हार गई है। जबकि विश्वासनगर से ओपी शर्मा और नेता प्रतिपक्ष रहे विजेंद्र गुप्ता ने रोहिणी सीट इस बार भी बचा ली। सीएम केजरीवाल सहित उनकी सरकार के सभी मंत्री चुनाव जीत गए हैं। इनमें सतेंद्र जैन, गोपाल राय, इमरान हुसैन, राजेंद्र पाल गौतम और कैलाश गहलोत शामिल हैं। वहीं, पटपड़गंज से चुनाव लड़े डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने बेहद कांटे की टक्कर में भाजपा के रवींद्र सिंह नेगी को 3207 वोटों पराजित किया। विधानसभा अध्यक्ष रामनिवास गोयल भी शाहदरा से चुनाव जीत गए हैं। दिल्ली का विधानसभा चुनाव विकास के मुद्दे से भटककर शाहीन बाग पर आकर ठहर गया था, जिसका सीधा फायदा आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों को मिला। शुरुआती रुझानों से ही आम आदमी पार्टी ने मुस्लिम बहुल सीटों पर बढ़त बनाए रखी, जबकि कांग्रेस को मुस्लिम वोटरों ने पूरी तरह से नकार दिया। दिल्ली में 12 फीसदी मुस्लिम वोटर हैं। 70 सीटों में से 8 सीटें चांदनी चौक, ओखला, सीलमपुर, मटिया महल, मुस्तफाबाद, बाबरपुर, सीमापुरी और बल्लीमारान मुस्लिम बहुल हैं।