अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीबो की छीन ली रोटी

कही पेट की आग शान्त करने के लिए इन गरीबो ने अपराध की दुनिया में कदम रख लिया तो प्रशासन का यह अतिक्रमण हटा कर सुरक्षा देने की योजना साबित होगी बकवास।


व्यवस्था के जिम्मेदारो ने अतिक्रमण हटाने के पूर्व सुरक्षा व्यवस्था के दूसरे पहलू को गम्भीरता से नही किया है चिन्तन मनन। 


*कौशाम्बी।* बीते एक सप्ताह से जनपद मुख्यालय मंझनपुर के जिला कचेहरी चौराहा और उसके आस पास सडक के पटरियो पर गोमती झोपडपटटी डालकर पेट पालने वाले गरीबो को बुल्डोजर लगाकर उजाड दिया गया है। जिससे गरीबो के सामने दो जून की रोटी की बिकट समस्या उत्पन्न हो गयी है। 


गरीब के बच्चे आने वाले दिनो में मुसीबत का आंकलन कर रो रहे है। और बुल्डोजर लगाकर अतिक्रमण के नाम पर गरीबो की गोमती झोपड पट्टी ध्वस्त कर दिये जाने के बाद गरीब जनता योगी और मोदी सरकार से सवाल उठा रही है कि क्या गरीबो के पेट में लात मारकर अतिक्रमण हटाना ही देश प्रदेश का सच्चा विकास है। 


 गौरतलब है कि अदालत के आस पास सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम को लेकर अदालत के निर्देष पर अतिक्रमण हटाये जा रहे है चौराहे और अदालत के आस पास लगभग तीन सौ परिवार ठेलिया गोमती झोपड पट्टी के सहारे सौ दो सौ रूपये प्रतिदिन कमाकर अपने बच्चो का पेट पालते थे यह गरीब झोपडपट्टी के सहारे बच्चो का पेट तो जरूर पालते थे लेकिन बीते दो दशक में इन छोटे छोटे गरीब परिवार के लोगो का कही भी अपराधिक इतिहास नही दिखायी पडा। फिर इन गरीब दुकानदारो से सुरक्षा व्यवस्था को खतरा कैसा लेकिन गरीब के पेट में लात मारकर सुरक्षा के नाम पर लोगो को भूखे मरने पर मजबूर कर दिया गया है और व्यवस्था के जिम्मेदारो ने अतिक्रमण हटाने के पूर्व सुरक्षा व्यवस्था के दूसरे पहलू को गम्भीरता से मनन चिन्तन नही किया है। 


अतिक्रमण हटाने के पूर्व इन गरीबो के जीवन पर गहन चिन्तन मनन करने की जरूरत थी कि आखिर रोजी रोटी छिन जाने के बाद यह गरीब लोग अपने परिवार का पेट पालने का कौन सा तरीका ढूढेगें। कही पेट की आग शान्त करने के लिए इन गरीबो ने अपराध की दुनिया में कदम रख लिया तो प्रशासन का यह अतिक्रमण हटा कर सुरक्षा देने की योजना बकवास ही साबित होगी।