बेचे गये बोर्ड परीक्षा केन्द्र तो कैसे रोकेंगे नकल

डीआईओएस कार्यालय से फर्जीवाडे की तैयार हुयी पृष्ठभूमि नकल भी होगा और बदली जायेगी उत्तर पुस्तिकायें।


नियमो को दरकिनार कर आयोग्य लोगो को केन्द्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षक बनाये जाने के पीछे क्या है डीआईओएस कार्यालय का मकसद।


कौशाम्बी। बोर्ड परीक्षा वर्ष 2020 में नकल विहीन कराने के सारे दावे पर शिक्षा विभाग के अधिकारियो ने ही जगह जगह छेद कर नकल कराने की योजना में माफियाओ को शामिल कर लिया है तो कैसे बोर्ड परीक्षा में नकल रोकी जायेगी। 


बीते तीन दशक से नकल के लिए बदनाम द्वाबा क्षेत्र की धरती मे इस वर्ष भी पुरानी परम्परा कायम है और पूरे वर्ष बन्द रहने वाले वित्तविहीन विद्यालयो को बोर्ड परीक्षा केन्द्र घोषित किया गया है। जॉच के नाम पर जिला परीक्षा समिति से लेकर शासन तक ने डीआईओएस की सूची में मोहर लगा दी है। खुलेआम दिख रही तमाम खामिया परीक्षा केन्द्रो के निर्धारण में लगे आलाधिकारियो को नही दिखायी पडी है।


तमाम परीक्षा केन्द्र ऐसे है जिनके पास मानक के अनुसार कक्ष नही है। फिर भी तमाम जॉच से वह पास हो गये है और परीक्षा केन्द्र बना दिये गये है। बोर्ड परीक्षा नियमावली में केन्द्र व्यवस्थापक प्रधानाचार्य ही बनाया जा सकता है। लेकिन तमाम विद्यालयो में सहायक अध्यापक को केन्द्र व्यवस्थापक डीआईओएस कार्यालय ने बना दिया है। यह खामी जानबूझकर की गयी है या फिर डीआईओएस कार्यालय धृतराष्ट बन गया है यह तो जॉच का विषय है।


 कई बोर्ड परीक्षा केन्द्रो में जिन्हे केन्द्र व्यवस्थापक बनाया गया है। वह अध्यापक की भी योग्यता नही रखते है। फर्जी बयोडाटा जमा कर केन्द्र व्यवस्थापक बनाने के पीछे किसका दोष है यह भी जॉच का विषय है। कक्ष निरीक्षको के तैनाती में भी बोर्ड नियमावली का पालन डीआईओएस कार्यालय ने नही किया है और फर्जी बायोडाटा के सहारे ऐसे लोगो को कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी सौप दी गयी है जिन्हे अध्यापक कहने में भी शर्म आती है। 


आखिर आयोग्य लोगो के हॉथ क्यों पूरी बोर्ड परीक्षा सौपी गयी है इसके पीछे डीआईओएस कार्यालय का क्या स्वार्थ है यह जॉच का बडा विषय है और यदि सपा बसपा के राज में बोर्ड परीक्षा केन्द्र नीलाम कर धनादोहन की परम्परा को कायम रखने वाले डीआईओएस कार्यालय की बिन्दुवार जॉच हुयी तो पूर्व के कई डीआईओएस के तरह वर्तमान डीआईओएस का भी निलम्बन होना तय है।


 कुछ अध्यापक ऐसे भी है जिनकी बीते कई वर्षो से एक ही परीक्षा केन्द्र में बार बार ड्यूटी लगायी जाती है आखिर ऐसा डीआईओएस कार्यालय क्यों कर रहा है। नकल कराने में सहयोग करने में जिन्होने हॉथ खडे कर दिये है उन्हे किनारे कर दिया गया है। बोर्ड परीक्षा की पूरी व्यवस्था में छेद कर बोर्ड के नियम को बलायताक पर रखकर धनादोहन करने वाले डीआईओएस के कृत्य से बोर्ड परीक्षा की सुचिता तार तार हो रही है। 


शिक्षा विभाग के बाबू से लेकर बोर्ड परीक्षा की ड्यूटी में लगे अधिकारियो का मुॅह बन्द करने का शिक्षा माफियओ ने पूरी तैयारी की है और उत्तर पुस्तिका बदलने से लेकर हर तरह की सुविधा देने का शिक्षा माफियाओ ने पूरा रेट खोल दिया है।शिक्षा व्यवस्था की सुचिता को तार तार करने वाले बदनीयत डीआईओएस के कारनामो को संज्ञान लेकर योगी सरकार कठोर कार्यवाही करेगी या फिर सपा बसपा सरकार की तर्ज पर नकल का यह खेल जिले में चलता रहेगा। 


विधायक की मेहनत भी हुयी फेल।


कौशाम्बी। जिले को नकल विहीन कराने का भरसक प्रयास चायल विधायक संजय गुप्ता ने किया था इसके लिए बराबर उन्होने छात्रो से सम्पर्क कर नकल विहीन परीक्षा देने का सुझाव दिया था। नकल विहीन परीक्षा कराये जाने का उन्होने अधिकारियो को भी निर्देषित किया था लेकिन बोर्ड परीक्षा में केन्द्र व्यस्थापक और कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी में बोर्ड नियमो के विपरीत आयोग्य लोगो को ड्यूटी लगाकर डीआईओएस कार्यालय क्या साबित करना चाहता है यह बडा सवाल है और इस सवाल ने योगी सरकार की निष्पक्ष परीक्षा पर सवाल खडा कर दिया है। 


30 हजार तक खुला वसूली का रेट।


कौशाम्बी। नकल विहीन परीक्षा की सुचिता तार तार कर 25 हजार से 35 हजार तक बोर्ड परीक्षार्थियो से वसूली का फरमान शिक्षा माफियाओ ने जारी कर दिया है 60 प्रतिशत परीक्षा फल देने का दावा शिक्षा माफिया कर धनादोहन कर रहे है। बीते कई वर्षो से टॉपर विद्यालय भी इस नकल के समय में किसी से पीछे नही है लेकिन नकल मंडी में शिक्षा विभाग तिजोरी भरने में लगा है और इस तिजोरी भरने में कोई पीछे न छूट जाये सब एक दूसरे से आगे निकल जाना चाहते है।