बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कारनामे बेनकाब

हरदोई।  बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी प्रशासन को गुमराह करने से बाज नही आ रहे हैं। द टेलीकास्ट टीम की पड़ताल में ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमे बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की हकीकत बेनकाब हो गई है। दरअसल हमारी टीम सुरसा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कमरौली पहुंची, जहां हमें एक ही स्कूल के 03 शिक्षामित्र मिले। शासनादेश पर गौर करें तो एक प्राइमरी स्कूल में 02 से अधिक शिक्षामित्रों की तैनाती नही हो सकती, जबकि यहाँ शिक्षामित्र अनामिका सिंह, प्रीती दीक्षित की पूर्व से तैनाती होने के बावजूद धर्मेंद्र द्विवेदी  को भी नियुक्त कर दिया गया। प्रधानाध्यापक अनुराग श्रीवास्तव ने बताया कि तीसरे शिक्षामित्र की नियुक्ति अभी हाल ही में यहां की गई है। उन्होंने बताया कि एक स्कूल में 02 शिक्षामित्रों की नियुक्ति तो नियमविरुद्ध है किंतु तीसरे शिक्षामित्र के पास जॉइनिंग लेटर होने की वजह से उन्हें यहां जॉइन कराना मजबूरी थी।  जब हमने इसके पीछे की सच्चाई पता की मालूम हुआ कि शिक्षामित्र ने अपने गांव में जॉइन करने के लिए विभागीय अधिकारियों को मोटी रिश्वत चुकाई है, जिसकी वजह से जिम्मेदारों ने नियमोँ को तार तार कर दिया।


केस नं०-02


सुरसा ब्लॉक के ही उच्च प्राथमिक स्कूल खुटेहना में एक और कारनामा सामने आया। यहां पहुंची द टेलीकास्ट टीम को 02 शिक्षक मिले, पंजीकृत कुल 61 बच्चों में महज 30 ही बच्चे उपस्थित थे। बताया गया कि इस स्कूल  के प्रधानाध्यापक आदित्य शर्मा लंबे अरसे से बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में नियमविरुद्ध अटैच हैं, जबकि उनके पास स्कूल का भी चार्ज है। हालांकि स्कूल में इंचार्ज के तौर पर अरुण प्रताप और सहायक शिक्षक अर्चना वर्मा मिली। उन्होंने स्कूल की जर्जर हालत और अव्यवस्थाओं को लेकर कुछ भी बोलने से मना कर दिया। 


जबकि इस सम्बंध में खंड शिक्षा अधिकारी से जब द टेलीकास्ट संवाददाता ने बात की तो उन्होंने बताया कि उक्त प्रधानाध्यापक आदित्य शर्मा के पास कोई आदेश होगा तभी वह अटैच हैं। यह मामला मेरे स्तर का नही है, इस बारे में बीएसए ही कुछ बता सकते हैं। नियमों पर गौर करें तो बेसिक शिक्षा विभाग के किसी भी शिक्षक का अटैचमेंट पूर्ण रूप से स्थगित है। ऐसे में अगर किसी शिक्षक को अटैच किया जाता है तो वह शासनादेश का उलंघन होगा।