भ्रष्ट  प्रधान के चलते आवास के लिए तरसते लोग

ग्रामीणों ने आवास के लिए बीस हजार रुपये मांगने का ग्राम प्रधान पर लगाया आरोप


नेवादा बिकास खण्ड के लोधउर ग्राम पंचायत का मामला।


चायल कौशाम्बी। आवास के लाभार्थियों से ग्राम प्रधानों द्वारा अवैध वसूली किये जाने का बार बार आरोप लग रहा है लेकिन फिर भी आवास योजना के जिम्मेदार वसूली में लिप्त लोगों पर कार्यवाही करते नही दिख रहे है 


ताजा मामला नेवादा बिकास खण्ड के लोधौर गांव का है जहाँ सरकारी आवास दिलाने के नाम पर बिकास भवन के अधिकारियों तक रकम पहुचाने का झांसा देकर आवास के पात्रों से मोटी रकम वसूल ली है भाजपा की योगी सरकार में जमकर धांधली और अवैध वसूली हो रही है जिससे ग्राम प्रधानों की कार्यशैली व सौतेला पन से ग्रमीण जनता को नहीं मिल पाता है सरकारी योजनाओं का कोई खास लाभ योगी सरकार के जिम्मेदार भी आंख मूंदकर कर वसूली में लिप्त लोगों का साथ दे रहे है।


जानकारी के मुताबिक नेवादा विकास खन्ड के लोधउर गाँव में आवास व शौंचालय को जनता तरस रही है। गांव की गरीब जनता के तरसने के बाद भी उसे कोई आस नहीं दिख रही है और तो और ग्राम प्रधान व सचिव दोनों ने मिलकर बीच में बीस हजार रुपये रकम वसूली की एक दीवार खड़ी कर दी है जिससे गरीब जनता पात्र हो कर भी अपात्र बनकर रह जाती है आखिर कब तक अवैध वसूली का खेल चलता रहेगा।


 संत लाल पुत्र बिदेशी तथा शिवकली पत्नी देवानन्द सहित तमाम लोगो ने
चायल तहसील दिवस में दिनांक 4 फरवरी को उपजिलाधिकारी चायल को  पत्र देते हुए आरोप लगाया है कि खन्ड विकास अधिकारी के कर्मचारियों द्वारा कई बार जांच हुई पात्र पाए जाने के बाद भी आज तक आवास नहीं मिला ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान से कई बार कहा और कई बार डाकोमेंट्स भी ले गये लेकिन बिना पैसा के कुछ नहीं हुआ 


साफ लफ्जो में ग्रामीणों ने कहा कि  प्रधान का कहना है कि बीस हजार रुपये दो तब तुम्हारा आवास मिल जायेगा अब योगी सरकार की ब्यवस्था पर बड़ा सवाल  है कि आखिर गरीब जनता  पैसा दे तब आवास मिले यह कंहा का न्याय है अब देखना यह है कि क्या उपजिलाधिकारी या फिर जिले के आलाधिकारी इसमें कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर हवा हवाई ही रह जाता है ग्राम प्रधान व सचिव का भ्रष्टाचार यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।