डीआईओएस को गिरफ्तार कर जेल भेजने में देरी क्यों

फर्जी बायोडाटा के सहारे केन्द्र व्यवस्थापक और  कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी लगाये जाने का मामला।


30 करोड का होता है प्रत्येक वर्ष शिक्षा व्यवसाय अघिकारियो तक पहुचता है 30 प्रतिशत हिस्सा।


कौशाम्बी।  उत्तर प्रदेश बोर्ड परीक्षा 2020 में बोर्ड परीक्षा केन्द्रो के निर्धारण में धांधली कर फर्जी अभिलेखो के सहारे बोर्ड परीक्षा केन्द्र के केन्द्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षक की ड्यूटी लगाये जाने के मामले में जिला विद्यालय निरीक्षक की भूमिका सार्वजनिक होने के बाद दो दिन बीत जाने के बाद भी जिला विद्यालय निरीक्षक पर मुकदमा दर्ज कराकर उन्हे जेल भेजने के मामले में शासन प्रशासन ने अभी तक कार्यवाही नही की है। जो योगी सरकार की व्यवस्था पर बडा सवाल है बोर्ड परीक्षा की सुचिता को तार तार कर तिजोरी भरने वाले जिला विद्यालय निरीक्षक के कृत्य ने प्रदेश की योगी सरकार की छवि पर बदनुमा धब्बा लगाया है। 


 गौरतलब है कि द्वाबा की धरती में बीते तीन दशक से शिक्षा माफियाओ द्वारा बोर्ड परीक्षा में नकल कराकर धनादोहन किया जाता है। शिक्षा मफियाओ का यह व्यवसाय प्रत्येक वर्ष बढ रहा है और देखते देखते जिले में शिक्षा व्यवसाय में बडा रूप ले लिया है। शिक्षा माफियाओ का व्यवसाय बढता रहे चाहे प्रदेश सरकार की किरकिरी होती रहे इसी उद्देश्य से शिक्षा अधिकारी बोर्ड परीक्षा के नियमो की खुले आम धज्जिया उडा कर बोर्ड परीक्षा संचालित कराते है। शिक्षा अधिकारियो का खेल यही खत्म नही होता है 


केन्द्र व्यवस्थापक और कक्ष निरीक्षको की ड्यूटी में फर्जी अभिलेखो और फर्जी बायोडाटा के सहारे बाहरी लोगो को केन्द्र में प्रवेश करा दिया जाता है। जिनके सहारे बोर्ड परीक्षा में धनादोहन और नकल कराने का खेल बेखौफ तरीके से खेला जाता है। जिले में बोर्ड परीक्षा संचालित कराने के लिए 77 परीक्षा केन्द्र बनाये गये है और इन परीक्षा केन्द्रो में केन्द्र व्यवस्थापक के पद पर प्रधानाचार्यो की तैनाती नही की है। जबकि बोर्ड नियमावली में स्पष्ट है कि केन्द्र व्यवस्थापक प्रधानाचार्य ही होगा। 


वही कक्ष निरीक्षको की तैनाती में भी फर्जी बायोडाटा अभिलेखो के सहारे बाहरी लोगो को बोर्ड परीक्षा का दायित्व जिला विद्यालय निरीक्षक ने सौप दिया है। बोर्ड परीक्षा को शुरू हुए दो दिन बीत चुके है और परीक्षा केन्द्रो में फर्जी तरीके से जिला विद्यालय निरीक्षक के साठ गाठ से बाहरी लोगो को प्रवेश करा दिया गया है। जो शिक्षा व्यवस्था पर बडा सवाल है।


 डीआईओएस के इस अंधेरगर्दी पर तमाम राजनैतिक दलो के प्रतिनिधियो ने भी हो हल्ला मचाकर डीआईओएस की गिरफ्तारी की आवाज बुलन्द की है लेकिन अभी तक डीआईओएस के काले कारनामो के चिठठो की जॉच आलाधिकारियो ने पूरी नही की है जो व्यवस्था पर बडा सवाल है। 


बोर्ड परीक्षा में जॉच के नाम पर बार बार परीक्षार्थियो की ही तालाशी लेना और सीसीटीवी  कैमरे के निगाह में बोर्ड परीक्षा कराया जाना ही क्या निष्पक्ष परीक्षा की श्रेणी में है यह बडा सवाल है। बोर्ड परीक्षा देखकर ऐसा लगता है कि सारा दोष परीक्षार्थियो का ही है और उन पर ऐसे अनुशासन बनाये जा रहे है जैसे वह दुश्मन देश की सीमा पार कर रहे है। अब डीआईओएस द्वारा फर्जी तरीके से कक्ष निरीक्षक व केन्द्र व्यवस्थापक की तैनाती दिये जाने पर सवाल उठने लगा है कि इन्होने क्यों बोर्ड परीक्षा नियमो की धज्जिया उडायी है


 फर्जी बायोडाटा पर बाहरी लोगो को क्यों तैनाती दी गयी है दोषियों की जॉच कर उन पर कार्यवाही और गिरफ्तारी में आखिर विलम्ब क्यों किया जा रहा है। इस गम्भीर बिन्दु पर डीएम कमिश्नर के साथ साथ शिक्षा सचिव क्यों बार बार पर्दा डालकर नजर अन्दाज कर रहे है। यह व्यवस्था पर बडा सवाल है और डीआईओएस के इस आचरण को शासन ने संज्ञान लिया तो डीआईओएस पर गाज गिरना तय है। लेकिन क्या योगी राज में यह सम्भव होगा। 


आधा दर्जन डीआईओएस हो चुके है निलम्बित।


कौशाम्बी। बोर्ड परीक्षा में नकल कराकर करोडो रूपये धनादोहन करने प्रदेश सरकार की छवि धूमिल करने के आरोप में वर्ष 2005 से जिला विद्यालय निरीक्षक के निलम्बन का सिलसिला शुरू हुआ है 15 वर्षो के बीच आधा दर्जन डीआईओएस निलम्बित हो चुके है लेकिन कौशाम्बी की चौपट बोर्ड परीक्षा व्यवस्था नही सुधर सकी है। आकडो पर गौर करे तो जिले में बोर्ड परीक्षा के नाम पर प्रत्येक वर्ष 30-40 करोड का व्यवसाय शिक्षा माफियाओ द्वारा किया जाता है और इस व्यवसाय का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा अधिकारियो तक पहुच जाता है जिससे परीक्षा व्यवस्था की सुचिता भंग करने में इन अधिकारियो को संकोच नही लगता है।