एक जनपद एक उत्पाद’ की तर्ज पर ‘एक जनपद एक विशेष फसल’ प्रोजेक्ट तैयार किया जाय- राज्यपाल

लखनऊ। 13 फरवरी, 2020, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज राजभवन में आयोजित कृषि विभाग उत्तर प्रदेश एवं कृृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के कुलपतिगण के साथ आयोजित बैठक में कहा कि ‘एक जनपद एक उत्पाद’ की तरह ही ‘एक जनपद एक विशेष फसल’ प्रोजेक्ट तैयार किया जाये, जिससे जनपद में होने वाली फसल विशेष को प्राथमिकता मिल सके। इसके साथ ही कृषि विश्वविद्यालय अपने उन विद्यार्थियों को खेती से सीधे जोड़े, जिनके पास खेती योग्य भूमि उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थी स्वयं का व्यवसाय कर सकेंगे और दूसरों को भी नौकरी दे सकेंगे।  
राज्यपाल ने कहा कि स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की दृष्टि से आज जैविक खेती को बढ़ावा दिये जाने की आवश्यकता है। अत्यधिक कृषि रासायनों एवं उर्वरकों के उपयोग से खाद्यान्न पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के बारे में किसानों को जागरूक किया जाये और उन्हें जैविक खेती को बढ़ावा देने को प्रेरित किया जाये। जैविक खेती द्वारा मृदा की प्राकृतिक उर्वरता भी बनी रहती है और पर्यावरण का क्षरण भी न्यूनतम होता है। राज्यपाल ने कहा कि किसानों के लिए आॅन-लाइन फसल उत्पाद बेचने की व्यवस्था पर भी कार्य करने की आवश्यकता है। इससे किसान सीधे अपने कृषि उत्पादों को बाहर बेच सकेंगे और बिचैलिये फायदा नहीं उठा सकेंगे। किसानों की आय दोगुनी करने के लिये विशेष कार्य किये जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए तभी उनकी आमदनी में अपेक्षित वृद्धि हो सकती है।
श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने कहा कि कृषकों को पारम्परिक खेती में नवीनतम तकनीकों का समावेश कर प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें मोटे अनाज के उत्पादन को बढ़ाने हेतु प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह सिद्ध हो चुका है कि मोटे अनाज मानव स्वास्थ्य के लिये बहुत लाभदायक हैं। राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इनकी मांग बढ़ रही है। राज्यपाल ने कहा कि कृषि विश्वविद्यालय सरकार पर निर्भरता कम कर आर्थिक उन्नयन का प्रयास करें तथा पब्लिक और किसान को एक साथ जोडने में अपनी भूमिका निभायें। इसके साथ ही विश्वविद्यालय किसानों को मृदा स्वास्थ्य परीक्षण के अनुसार फसलों की बुआई करने, फसल अवशेष न जलाने तथा पर्यावरण बचाने हेतु भी प्रेरित करें।
प्रमुख सचिव कृषि श्री अमित मोहन प्रसाद ने बैठक में कहा कि प्रदेश के 18 मण्डलों में किसानों की सब्जियों तथा अन्य फसलों के जैविक उत्पादों को बेचने के लिए मण्डियों में एक स्थान उपलब्ध कराया जायेगा, जिसमें किसान अपने कृषि उत्पादों को सीधे बेच सकते हैं। इसके लिये प्रत्येक माह के पहले और तीसरे शनिवार-रविवार का दिन निश्चित किया गया है। उन्होंने बैठक में यह भी बताया कि ‘द मिलियन फार्मर्स स्कूल’ के माध्यम से किसानों को खेती के बारे में नवीनतम जानकारी कृषि विशेषज्ञों द्वारा दी जाती है।
बैठक में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव श्री हेमन्त राव, प्रमुख सचिव पशु श्री बी0एल0 मीना, पं0 दीनदयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो अनुसंधान संस्थान मथुरा के कुलपति प्रो0 जी0के0 सिंह, सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति डाॅ0 आर0के0 मित्तल, नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय अयोध्या के कुलपति डाॅ0 बृजेश, बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय बांदा के कुलपति डाॅ0 यू0एस0 गौतम, चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर के कुलपति डाॅ0 डी0आर0 सिंह, राज्यपाल के विशेष सचिव श्री अशोक चन्द्र तथा राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी श्री केयूर सम्पत उपस्थित थे।