खादी और खाकी के बीच पिसी जनता, रक्षक ही बने भक्षक

लखनऊ। कहने को तो चाहे खादी पहनने वाले नेता जब तक कुर्सी नहीं मिलती है। तब तक बड़े - बड़े वादे किए जाते हैं। यहां तक कि शपथ भी दिलाई जाती है कि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे। लेकिन सत्ता मिलने के बाद सारे वादे फ़ाइलों में बंद कर दिए जाते हैं। जनता जिए या मरे उनको कोई फर्क़ नहीं पड़ता है। आम आदमी अपना परिवार का पेट भरने के लिए रोज़गार ढूढ़ रहा है। लेकिन जहां जाओ वहाँ उसे निराशा ही हाथ लगती है। क्योंकि सरकार केवल अपना वोट बैंक देखती है। जब कभी बात होती है रोजगार की तो सत्ता में रहने वाले मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री तक पहले अपने आदमी को नौकरी देते हैं। उसके बाद आम आदमी का नंबर लगता है। तब उससे धन की मांग की जाती है। क्योंकि अब सरकारी नौकरी बिक रही है। जिसे चाहिए पैसा दे तो उसे मिलेगी। देखा जाए तो अब चपरासी की नौकरी के लिए लाखों रुपए की मांग की जाती है। क्योंकि अब पढ़ाई का कोई महत्व नहीं रह गया है। हर जगह केवल पैसे की मांग की जाती है। हाल ये कि इतनी पढ़ाई कर के जो युवा आईएएएस,पीसीएएस, आईपी एस बनते हैं उन्हें अनपढ़ नेताओं की जी हजूरी करनी पड़ती है। उदाहरण के तौर पर बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके लालू प्रसाद यादव जैसे नेता जो ठीक से अपना नाम तक नहीं लिख सकते हैं। वो अपना राज्य चलाते हैं। ठीक वैसे ही हमारे भारत और उत्तर प्रदेश के कुछ नेता ऐसे हैं जिनको अपना नाम तक लिखना नहीं आता है और उनके हाथों में देश की बागडोर है। अगर बात करें। भारत की राजधानी दिल्ली की तो केजरीवाल जैसा मुख्यमंत्री होना चाहिए। जो पढ़ा लिखा है और समझदार है।


अब बात करते हैं खाकी की तो खाकी को जनता का सेवक और रक्षक कहा गया है। लेकिन अब रक्षक ही भक्षक बन गए हैं। आए दिन पुलिस अपने कारनामों से चर्चा में रहती है। एक कहावत है कि पुलिस अगर अपने आप पर आ जाए तो मंदिर से एक चप्पल तक चोरी नहीं हो सकती है। लेकिन ऐसा नहीं होता। चोर हाथ साफ कर के चल देता है और पुलिस देखती रहती है। अभी बीते शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के क्षेत्र गोरखपुर में दो सिपाहियों ने एक लड़की के साथ दुष्कर्म किया और उसे पैसा (600) रुपया देकर भगा दिया। ये हाल है उत्तर प्रदेश की पुलिस का जो आरोप से ही घिरी हुई है। लेकिन सरकार के नुमाइंदों के उपर कोई फर्क नहीं पड़ता है। क्या होगा हमारे भारत जो अनपढ़ के हाथ में देश की बागडोर है।