राजभवन में भी प्राकृतिक खेती की शुरूआत होगी-- राज्यपाल


लखनऊ। 14 फरवरी, 2020  उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज राजभवन में महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखण्ड विश्वविद्यालय, बरेली की प्रोफेसर तूलिका सक्सेना द्वारा सम्पादित पुस्तक ‘एनाहसिंग    ऑर्गेनाइजेशनल इफेक्टिवेनेस एण्ड सस्टेनेबिलिटी-ईसू ऑफ कंसर्न’ ( Enhancing Organizational Effectiveness and Sustainability-Issue of Concern) का विमोचन किया।
     राज्यपाल ने पुस्तक की रचना हेतु प्रोफेसर तूलिका सक्सेना को बधाई देते हुए कहा कि प्रबन्धन विधा पर आधारित यह पुस्तक विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए उत्कृष्ट मार्गदर्शक सिद्ध होगी।  


उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने आज राजभवन में लोक भारती की मासिक पत्रिका ‘लोक सम्मान’ के ‘गो-आधारित प्राकृतिक कृषि’ विशेषांक का लोकार्पण करते हुए कहा कि अब राजभवन में भी प्राकृतिक खेती की शुरूआत होगी, क्योंकि यहां गो-आधारित सभी संसाधन मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि मानव स्वास्थ्य के दृष्टिगत वैज्ञानिक भी मोटे अनाज के प्रयोग पर बल दे रहे हैं। आज से 50-60 साल पहले जब मोटे अनाज का लोग प्रयोग करते थे तो हृष्ठ-पुष्ठ रहा करते थे और बीमारियां भी कम होती थी। जब से खाद्यान्न उत्पादन में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग बढ़ा है तब से उत्पादन के साथ-साथ बीमारियां भी बढ़ी हैं।
     राज्यपाल ने कार्यक्रम में उपस्थित प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक खेती में आप लोगों के योगदान का फायदा आने वाली पीढ़ी को निश्चित रूप से मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि आप लोग अपने पास पड़ोस के किसानों को भी गो-आधारित प्राकृतिक खेती से जोड़ेंगे। इससे न केवल कृषि लागत में कमी आयेगी बल्कि किसान की आमदनी में भी अपेक्षित वृद्धि होगी। उन्होंने लोक भारती की मासिक पत्रिका ‘लोक सम्मान’ के ‘गो-आधारित प्राकृतिक कृषि’ विशेषांक’ की सराहना करते हुए कि यह विशेषांक किसानों के लिये लाभदायक होगा।
     कार्यक्रम में लोक भारती के अध्यक्ष प्रोफेसर ए0पी0 तिवारी तथा संगठन मंत्री श्री बृजेन्द्र पाल सिंह, श्री श्रीकृष्ण चैधरी ने भी प्राकृतिक खेती पर अपने विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर कृषि निदेशक श्री सोराज सिंह के अलावा बड़ी संख्या में किसाान एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।