तुर्रम खां थानेदार से फरियादी त्रस्त

आलाधिकारियो के साथ साथ अदालत के आदेशों की अवहेलना करने के आदी हो गये है महेवाघाट थानेदार 


बालू के अवैध खनन,गांजा, शराब तस्करी, हरे पेडो की अवैध कटान, डग्गामार वाहन सहित विभिन्न संगठित अपराधो से लाखो रूपये प्रतिदिन की है थानेदार की काली कमायी


कौशाम्बी। पुलिस वर्दी को कलंकित कर एक सूत्रीय अभियान धनादोहन का बनाने वाले थानेदारो से फरियादी त्रस्त है लेकिन अवैध वसूली में लिप्त इन थानेदारो के कारनामो को सुनने के बजाय क्षेत्राधिकारी फरियादियो को तबज्जो नही देते है। जिससे फरियादी के सामने मुसीबत खडी हो जाती है। अवैध वसूली में लिप्त इन थानेदारो की तुर्रम खां की हालत यह हो गयी है कि अब तुर्रम खां थानेदार पुलिस आलाधिकारियो प्रशासनिक आलाधिकारियो के साथ साथ अदालत के आदेशों का भी पालन नही करते है। जिससे सामाजिक व्यवस्था चरमरा रही है। लेकिन तुर्रम खां थानेदारो के आचरण पर रोक कौन लगायेगा। यह योगी सरकार की व्यवस्था पर बडा सवाल है। जिले के महेवाघाट थाने में इन दिनो इसी तरह का एक तुर्रम खां थानेदार रमेश पटेल को पुलिस कप्तान ने थानेदारी सौप दी है।
 
 महेवाघाट थाने में तैनात तुर्रम खां थानेदार रमेश पटेल ने बालू लदे वाहन संख्या-यूपी 72 बीडी 8303 के चालक से अवैध वसूली की डिमांड की और डिमांड न पूरी होने पर इस वाहन को पुलिस ने सीज कर दिया। थानेदार से त्रस्त वाहन स्वामी सीजेएम की अदालत में अवमुक्त प्रार्थना पत्र संख्या-693/2020 सरकार बनाम महेश यादव दाखिल कर वाहन अवमुक्त किये जाने की याचना की प्रार्थी के परिवाद को सुनने के बाद 12 फरवरी को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने उक्त वाहन को पंजीकृत स्वामी को सुपुर्द करने का निर्देष महेवाघाट थानेदार को दिया। इसी वाहन के बाबत एक आदेश 7 फरवरी को अदालत द्वारा दिया गया है कि उक्त वाहन को अवमुक्त कर दें। लेकिन इन दोनो आदेशों का पालन करने के लिए महेवाघाट थानेदार कतई तैयार नही है जिससे पीडित होकर वाहन स्वामी ने अदालत में थानेदार के विरूद्ध अवमानना वाद दाखिल कर दिया है। अवमानना वाद में अदालत ने महेवाघाट थानेदार को 17 फरवरी को अदालत में उपस्थित होने का निर्देष दिया है। 


 बालू के अवैध खनन के साथ साथ गांजा शराब तस्करी हरे पेडो की अवैध कटान डग्गामार वाहन सहित विभिन्न संगठित अपराधो से लाखो रूपया प्रतिदिन की काली कमायी करने वाले महेवाघाट थानेदार रमेश पटेल के कारनामो की कहानी यही नही समाप्त होती। जगदीश पाण्डेय के वाहन संख्या-यूपी 73 एम 5536 को थाने में गलत तरीके से सीज किये जाने के मामले में अदालत में जगदीश पाण्डेय ने याचना कर वाहन अवमुक्त किये जाने की मांग की जिस पर अदालत ने महेवाघाट थानेदार को निर्देशित किया कि उक्त वाहन को वाहन स्वामी के सुपुर्दगी में प्रदान कर दें। इसी मामले में 7 फरवरी को भी एक आदेश मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा वाहन अवमुक्त किये जाने के सम्बन्ध में दिया गया है। 


लेकिन इस आदेश को भी थानेदार मानने को कतई तैयार नही है। थानेदार के कृत्य का यह तो कुछ उदाहरण है प्रतिदिन आलाधिकारियो के आदेशों की धज्जिया उडाना अदालती आदेशों का पालन न करना महेवाघाट थानेदार की दिनचर्या बन चुकी है। जो पुलिसिया व्यवस्था पर बडा सवाल है और काननू नियम की धज्जिया उडा कर माफियाओ अपराधियो की तरह मनमानी तानाशाही स्वयं के कानून पर थाना चलाने वाले थानेदार पर आलाधिकारी क्या कार्यवाही करेंगे। यह योगी सरकार पर बडा सवाल है या तुर्रम खां थानेदार की अवैध वसूली बेरोक टोक चलती रहेगी और आलाधिकारी मूक दर्शक रहेंगे। जनता इस पर योगी सरकार से जवाब चाहती है।