निर्भया के दोषियों की फांसी तीसरी बार टली, पवन की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित

नई दिल्ली। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के जज धर्मेंद्र राणा ने सोमवार (2 मार्च) को निर्भया सामूहिक बलात्कार और हत्या के चारों दोषियों की मौत की सजा पर अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी। अदालत ने कहा कि ऐसे में जब दोषी पवन कुमार गुप्ता की दया याचिका राष्ट्रपति के पास लंबित है, फांसी नहीं दी जा सकती। सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुधारात्मक याचिका (क्यूरेटिव पिटीशन) खारिज होने के बाद पवन ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका की है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बात की पुष्टि की है कि पवन की दया याचिका उन्हें मिल गई है। अब मंत्रालय यह याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को भेजेगा और वह इस पर विचार करेंगे तथा फैसला लेंगे।


दक्षिण दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक चलती बस में 23 वर्षीय छात्रा 'निर्भया से सामूहिक बलात्कार और उसपर बर्बर हमला हुआ था। निर्भया की 29 दिसंबर को उसी साल सिंगापुर के माउंट एलिजाबेथ अस्पताल में मौत हो गई थी। मुकेश सिंह, विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह, पवन गुप्ता, राम सिंह और एक किशोर को इस मामले में दोषी पाया गया था। राष्ट्रपति मुकेश, विनय और अक्षय की दया याचिका अस्वीकार कर चुके हैं। राम सिंह ने जेल में आत्महत्या कर ली थी और किशोर को सजा पूरी करने के बाद रिहा कर दिया गया था।
उच्चतम न्यायालय ने 2012 के निर्भया सामूहिक बलात्कार-हत्या मामले में दोषी पवन कुमार गुप्ता की सुधारात्मक याचिका सोमवार (2 मार्च) को खारिज कर दी। इस जघन्य अपराध के लिये पवन समेत चार दोषियों को मौत की सजा सुनायी गई है। सभी दोषियों को मंगलवार (3 मार्च) को फांसी दी जानी थी, हालांकि अब इसे अगली आदेश तक के लिए टाल दिया गया है। न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने पवन की सुधारात्मक याचिका पर विचार किया था। इसी पीठ ने फांसी पर रोक लगाने की पवन की अर्जी भी खारिज कर दी। शीर्ष अदालत ने कहा, ''फांसी पर रोक की अर्जी खारिज की जाती है। सुधारात्मक याचिका खारिज की जाती है।'' पीठ के अन्य सदस्यों में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल थे।