लोहिया संस्थान में जूनियर डॉक्टरों की लापरवाही ने बुधवार को बुजुर्ग महिला की गई जान


लोहिया संस्थान में जूनियर डॉक्टरों की लापरवाही ने बुधवार को बुजुर्ग महिला की जान ले ली। तीमारदारों का आरोप है कि जब वे महिला को इमरजेंसी में लाए तो उनके कोविड निगेटिव होने की रिपोर्ट भी थी। बावजूद इसके डॉक्टरों ने समय पर उनका इलाज नहीं किया। कई सिफारिशों के बाद जब उन्हें अंदर ले गए तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। वहीं अस्पताल प्रशासन ने आरोपों को नकारा है।


सुल्तानपुर की रहने वाली बुजुर्ग महिला प्रभावती (60) को सांस लेने में तकलीफ थी। जिला अस्पताल सुल्तानपुर से बुधवार को उन्हें लोहिया संस्थान भेजा गया। तीमारदार उन्हें लेकर लोहिया संस्थान की इमरजेंसी में पहुंचे। तीमारदार आलोक का आरोप है दो घंटे तक किसी डॉक्टर ने उन्हें हाथ तक नहीं लगाया। इस दौरान बुजुर्ग महिला मरीज की हालत लगातार बिगड़ती रही।
तीमारदारों ने निदेशक से लेकर अन्य अफसरों से सिफारिश कराई। तब कहीं जाकर मरीज को अंदर ले गए। इसी बीच बुजुर्ग महिला ने दम तोड़ दिया। वहीं संस्थान प्रवक्ता डॉ. श्रीकेश का कहना है कि इमरजेंसी में आने वाले हर व्यक्ति को पांच मिनट के अंदर ही इलाज मिलना शुरू हो जाता है। ऐसा संभव ही नहीं है कि मरीज को प्राथमिक उपचार न मिले। तीमारदारों के आरोप गलत हैं।
कोविड के खौफ ने लीं कई जानें
कोविड की वजह से डॉक्टर मरीजों को इलाज देने में हिचकिचाते हैं। केजीएमयू के होल्डिंग एरिया में कई मरीजों की समय पर इलाज न मिलने से जान जा चुकी है। कई मरीजों की कोविड रिपोर्ट के इंतजार में सांसें उखड़ गईं। चिकित्सा संस्थानों में आने वाले गंभीर मरीजों को अभी भी प्राथमिक इलाज देकर होल्डिंग एरिया में रोक दिया जाता है।


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