क्या गैर बीजेपी शासित राज्यों ने एक रणनीति बनाकर मजदूरों से किराया वसूल किया?


 




कोरोना और लॉकडाउन के बीच मजदूर अपने-अपने घरों को वापस लौट रहे हैं।













नई दिल्ली। कोरोना में लॉकडाउन के बीच मजदूर अपने-अपने घरों को वापस लौट रहे हैं. ऐसे में ट्रेनों से लौट रहे इन मजदूरों के रेल किराए को लेकर विवाद उत्‍पन्‍न हो गया है. विपक्ष आरोप लगा रहा है कि कोरोना के संकट के बीच इन बेबस मजदूरों से किराए के पैसे ले रही है. वहीं रेलवे ने साफ किया है कि वह 85 फीसद खर्च उठ रहा है और केवल 15 फीसद ऐसे राज्‍यों से ले रहा है जहां से ट्रेंने गंतव्‍य स्‍थल की ओर रवाना हो रही हैं. इस बीच कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने कहा है कि उनकी पार्टी मजदूरों का किराया भरेगी. इस राजनीतिक विवाद के बीच सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या गैर बीजेपी शासित राज्यों ने एक रणनीति के तहत मजदूरों से किराया वसूल किया. रेलवे के मुताबिक केरल, राजस्थान और महाराष्ट्र से जाने वाले यात्रियों से किराया वसूल किया गया है, बाकी राज्यों ने मुफ्त में ही मजदूरों को सफर कराया है. केरल, राजस्थान और महाराष्ट्र तीनों ही राज्यों में गैर बीजेपी शासित सरकार है।


मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना जैसे कई राज्यों ने मुफ्त में ही मजदूरों को सफर कराया है. रेलवे का कहना है कि उसने राज्य सरकारों को परिचालन कीमत का 15 फीसदी किराया ही चुकाने को कहा है, जो हर राज्य पैसा दे रहा है. अभी तक कई राज्य रेलवे को पेमेंट कर चुके हैं और कई का प्रोसेस जारी है।


रेलवे सीधे किसी भी पैसेंजर को टिकट नहीं दे रहा है, रेलवे राज्यों के कहने पर ट्रेनें चला रहा है. लिहाजा जो राज्य ट्रेन मांगता है, उसी राज्य से परिचालन कीमत का 15 फीसदी किराया भी रेलवे देने को कहता है. जो ट्रेन यात्रियों को लेकर जाती है और वहां से खाली वापस आती है, रेलवे ने अपने परिचालन की लागत में उसकी कीमत भी जोड़ी है. अभी तक रेलवे कई राज्यों को 39 ट्रेनें उपलब्ध करा चुका है।






 

झारखंड जैसे कुछ राज्य ऐसे हैं, जहां मजदूर थे, लिहाजा उन्होंने ही ट्रेन का पैसा रेलवे को दिया. कुछ राज्य ऐसे भी हैं जो अपनी तरफ से मजदूरों को दूसरे राज्य भेजना चाहते थे, लिहाजा उन्होंने ही रेलवे से ट्रेन मांगी और रेलवे को किराया भरा। 


















रेलवे को सभी राज्यों से परिचालन लागत का 15% पेमेंट मिल रहा है. बड़ी बात यह है कि अधिकतर राज्यों ने रेलवे को पैसा तो दिया लेकिन अपनी तरफ से जाने वाले पैसेंजर से किराया नहीं लिया. सिर्फ केरल, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्य अभी तक सामने आए हैं जिन्होंने अपने यहां से जाने वाले मजदूरों से ही इसकी कीमत वसूल की।


केरल, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश, बिहार, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश जैसे तकरीबन 15 राज्य ऐसे हैं, जिन्होंने रेलवे से मजदूरों या फंसे यात्रियों के लिए ट्रेनें मांगी हैं. अभी तक 39 स्पेशल ट्रेनें ऑपरेट की जा चुकी हैं।


रेलवे का साफ कहना है कि हमें इससे कोई लेना-देना नहीं कि राज्य मजदूरों को मुफ्त में ट्रेनों में भेजें या उनसे किराया वसूल करें, हमें तो सिर्फ उस राज्य से मतलब है जिसने हमसे ट्रेन को मांगा है. वही राज्य रेलवे को किराया देगा।






























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